“बचपन का प्यार” भूल जाना पर “माँ-बाप का प्यार” नहीं!

बचपन का प्यार क्या वाकई एक हकीकत है या कुछ और?

Bachpan Ka Pyaar, Image Credit - Badshah YouTube Video
Bachpan Ka Pyaar, Image Credit - Badshah YouTube Video

आजकल एक गाना बड़ा ही ट्रेंड में चल रहा है।

जाने मेरी जानेमन बचपन का प्यार
मेरा भूल नहीं जाना रे
जैसा मेरा प्यार है, जान तुझे किया है
बचपन का प्यार
मेरा भूल नहीं जाना रे

गाना सुनने में तो बहुत ही अच्छा लग रहा है और बच्चे की भोली आवाज़ में तो और भी मन को लुभा रहा है।

कौन है “बचपन का प्यार” गाकर फेमस होने वाला बच्चा?

इस बालक का नाम है सहदेव दिर्डो (Sahdev Dirdo) जो कि छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के छिंदगढ़ प्रखंड का रहने वाला है।

अभी यह बालक छोटा है पर इस गाने की प्रसिद्धि ने इसे अभी से बुलंदी पर पहुँचा दिया है।

सहदेव दिर्डो “बचपन का प्यार” गाना गाकर आखिर कैसे इतना प्रसिद्ध हुआ?

कहते है किस्मत में जो लिखा होता है, वही मिलता है।

और इस बालक की किस्मत में बचपन में ही फेमस होना लिखा था।

आखिर जहाँ लोग प्रसिद्ध होने के लिए क्या-क्या नहीं करते वहीं कुछ लोग मात्र एक दिन में ही पुरे देश में छा जाते है।

सहदेव भी उन्हीं लोगों में से है। पर इसके पीछे बहुत लम्बी कहानी है। किसी फिल्म की स्टोरी जैसी।

सबसे पहले इस गाने को सहदेव के शिक्षक ने करीब दो साल पहले स्कूल में रिकॉर्ड किया था, फिर बादशाह ने इस वीडियो का रीमिक्स पोस्ट किया जिससे सहदेव को शोहरत मिली और फिर बादशाह के साथ इस गाने का नया वर्शन भी रिकॉर्ड किया।

सब कुछ इतनी जल्दी भी नहीं हुआ – पूरे दो साल लगे सहदेव को इस मुकाम पर आने में।

पूरे दो साल।

Bachpan Ka Pyaar Official Youtube Video by Badshah Sahdev Dirdo Aastha Gill Rico
Image Credits: Official YouTube Channel of Badshah

सहदेव और बादशाह के नए गाने को अब तक तीन सप्ताह में 137 मिलियन से ज्यादा लोग ने यूट्यूब पर देख चुके है।

इस बच्चे को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बुलाकर सम्मानित किया और गाना सुना।

सवाल: क्या इतनी छोटी सी उम्र में बिना कोई मेहनत किए इतनी जल्दी प्रसिद्ध हो जाना क्या वाकई एक सफलता माना जाना चाहिए?

आजकल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोस के जरिए फेमस होने का चलन बन चुका है।

“रानू मंडल” और “बाबा का ढाबा” जैसे उदाहरण हम देख ही चुके है। और उनका पतन भी किस तरह हुआ यह भी हम साक्षात् अनुभव कर ही चुके है।

पर यहाँ मामला अलग है।

यहाँ एक 12 साल का बच्चा है जिसे अभी वयस्क बनने में अभी भी 6 साल बचे है। और उसे प्रसिद्धि भी तुरंत मिल चुकी है। और अब उसके सामने इसी शोहरत को बरकार रखने का दबाव रहेगा।

जहाँ बड़े से बड़ा गायक भी मुश्किल से 10 साल ही टिक पा रहा है, वहाँ एक बच्चा कब तक टिक पाएगा यह तो समय ही बताएगा।

पर एक बड़ा सवाल यह है कि क्या अब दूसरे बच्चे “सहदेव दिर्डो” को एक उदाहरण मानकर प्रसिद्धि नहीं पाना चाहेंगे?

जो गाना सहदेव दिर्डो ने महज एक भोले बच्चे की आवाज़ में बिना कोई सोचे समझे केवल एक फरमाइश पर सुनाया था, वैसा गाना इतने छोटे बच्चे को कहाँ से याद हुआ होगा?

क्या ऐसा गाना किसी सभ्यता पर खरा उतरता है?

पल-पल पर “प्यार के रिश्ते” बदलने वाला समाज क्या अब “बचपन का प्यार” याद रख पाता होगा?

बचपन का प्यार मतलब माता-पिता का प्यार! निःस्वार्थ प्यार! Click To Tweet

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