क्या लता मंगेशकर और सचिन तेंदुलकर ने देश की एकता के पक्ष में ट्ववीट्स करके अपराध किया है?

आज खबर आई है कि महाराष्ट्र सरकार उन सभी प्रभावशाली लोगों के ट्ववीट्स की जांच कराएगी जिन्होंने रिहाना के ट्ववीट करने के बाद देश की एकता को बरकरार रखने को लेकर ट्वीट किया था।
आज खबर आई है कि महाराष्ट्र सरकार उन सभी प्रभावशाली लोगों के ट्ववीट्स की जांच कराएगी जिन्होंने रिहाना के ट्ववीट करने के बाद देश की एकता को बरकरार रखने को लेकर ट्वीट किया था।
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आज खबर आई है कि महाराष्ट्र सरकार उन सभी प्रभावशाली लोगों के ट्ववीट्स की जांच कराएगी जिन्होंने रिहाना के ट्ववीट करने के बाद देश की एकता को बरकरार रखने को लेकर ट्वीट किया था। महाराष्ट्र की सरकार इन ट्ववीट्स की जांच इस आधार पर कराना चाहती है कि क्या कहीं इन लोगों ने यह ट्ववीट्स किसी के दबाव में आकर किए थे?

इन लोगों में प्रमुख है लता मंगेशकर और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर।

इन सभी लोगों ने भारत की एकता और संप्रभुता को लेकर ट्वीट किया था। पर यह बात महाराष्ट्र की महा विकास अघाड़ी की सरकार के कांग्रेस और एनसीपी के साथ-साथ शिवसेना को भी पसंद नहीं आई।

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने इस जांच का आदेश दिया है। उनका कहना है कि जितने भी लोगों ने ट्ववीट किए थे उन सब की टाइमिंग और ट्ववीट एक जैसे ही है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या अब ट्ववीट करने पर भी जांच होने लग जाएगी। गौर करने वाली बात यह है की इन सभी के ट्ववीट शब्दशः तो बिलकुल भी नहीं है।

एक तरफ जहां दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत का केस अभी तक नहीं सुलझ पाया है वही एक गैर जरूरी जांच क्या इतनी जरूरी है?

उससे भी बड़ी बात यह है कि अब क्या देशभक्त होना भी एक जुर्म हो गया है?

क्या जाँच उन लोगों के खिलाफ नहीं होना चाहिए जो किसान आंदोलन की आड़ लेकर झूठी खबरें देश और विदेश में फैला कर हमारे प्यारे देश भारत को बदनाम कर रहे हैं?

क्या जाँच उन विदेशी लोगों के खिलाफ नहीं होना चाहिए जिनका पर्दाफाश हो चुका है की वो पैसे लेकर भारत को बदनाम करने के लिए ट्वीट कर रहे है?

दिल्ली की पुलिस भले ही जाँच कर रही हो पर एक राज्य, जो की एक स्वतंत्र और संप्रभु भारत का हिस्सा है, उससे यह उम्मीद कैसे की जा सकती है की वह अपने ही देश के नागरिकों के खिलाफ जाँच बिठा दे, वह भी देशहित में बोलने पर।

तमाम लेफ्ट और कम्युनिस्ट नेता चाहे वह देश के हो या फिर विदेश के हो या फिर सिलेब्रिटीज ही हो वह मोदी सरकार के फासिस्ट होने का दावा करते हैं।

अब यह जो हो रहा है, वो क्या है? सोशलिज्म!!

अगर दूसरे देशों के लोग हमारे देश के आंतरिक मुद्दों पर बोलते हैं तो क्या हम भारत के नागरिक होकर भी उन्हें इस बात के लिए नहीं कह सकते कि आप हमारे देश के आंतरिक मुद्दों में दखलअंदाजी ना करें?

अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का इससे बड़ा उदाहरण आज तक कहीं भी नहीं मिलेगा।

इस सारी कवायद का यही निष्कर्ष है कि जो भी देश के लिए आवाज़ उठाएं उसे दबा दिया जाए।

सरकारी मशीनरी का इस प्रकार दुरुपयोग किया जा रहा है की प्रभावशाली व्यक्ति तो क्या आम आदमी भी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने के पहले 10 बार सोचेगा।

क्या सरकारों को नागरिक इसलिए चुनते है की सरकार जब चाहे तब कोई तुगलकी फरमान जारी कर दे, ताकि नागरिकों को साँस लेने में भी डर महसूस होने लगे?

ईदी अमीन ने कहा था कि मैं फ्रीडम ऑफ स्पीच की गारंटी तो दे सकता हूँ पर स्पीच के बाद फ्रीडम की गारंटी नहीं दे सकता। ट्वीटर पर तेजस्वी सूर्या

क्या अब यही भविष्य है?

ईदी अमीन की बात महाराष्ट्र सरकार पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है।

महाराष्ट्र में देश हित की बात करना एक पनिशेबल क्राइम हो चुका है।  ट्वीटर पर एक यूजर

अब यह फैसला हम आप पर छोड़ते हैं कि एक राज्य ने जब इस प्रकार का फैसला लिया है तो क्या दूसरे राज्यों की सरकारें इस फैसले का अनुसरण करेंगी या नहीं।

यह फैसला महाराष्ट्र की और देश की जनता के लिए किस प्रकार घातक होगा यह तो वक्त ही बताएगा।

इस बदलते वक्त में जनता को यह समझ लेना चाहिए कि वे जिसे भी चुने वह व्यक्ति सही होना चाहिए और जनता का रक्षक होना चाहिए वरना जैसा आज एक राज्य में हो रहा है वैसा कहीं भी हो सकता है।

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